Tuesday, January 1, 2019

राजे सरकार के फैसलों की होगी समीक्षा, उठाए ये कदम

राजस्थान में सत्ता में आते ही कांग्रेस एक्शन में आ गई है. राजस्थान के शिक्षा राज्य मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के राजनीतिकरण के पक्ष में नहीं है और पूर्व सरकार की ओर से 'दुर्भावना से' किए गए फैसलों की समीक्षा करेगी. हाल ही में मंत्री ने वसुंधरा सरकार के दौरान किताबों में हुए बदलाव की समीक्षा करने की बात कही थी.

साथ ही उन्होंने राजस्थान राज्य ओपन स्कूल परीक्षा में राज्य स्तर पर सर्वोच्च स्थान पाने वाले परीक्षार्थी को देय मीरा पुरस्कार व एकलव्य पुरस्कार की राशि को 11 हजार रूपये से बढ़ाकर 21-21 हजार रूपये करने की घोषणा की. डोटासरा ने शिक्षा संकुल में ओपन स्कूल के परीक्षा परिणाम भी जारी कर दिए हैं. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा में राजनीतिकरण के पक्ष में नहीं है.

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उन्होंने कहा, 'राज्य की पिछली सरकार ने दुर्भावना से जो कार्य किए थे उनकी समीक्षा की जाएगी और प्रदेश की जनता के हित में और शिक्षा की गुणवत्ता के लिए जो ठीक होगा वही किया जाएगा.' उन्होंने कहा कि इस परीक्षा में जिला स्तर पर अव्वल रहने वाले परीक्षार्थियों को भी अब पुरस्कार के रूप में 3100 रूपये की बजाय 11 हजार रूपये दिए जाएंगे.

डोटासरा ने कहा कि ओपन स्कूल की परीक्षाओं में अधिक से अधिक अभ्यर्थी बैठे, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य सरकार की ओर से ओपन स्कूल के राजकीय संदर्भ केन्द्रों में कम्प्यूटर, प्रिंटर, प्रोजेक्टर और अन्य आवश्यक सामग्री के लिए 5.50 करोड़ रूपये राशि का प्रावधान किया जाएगा. यह राशि आगामी दो माह में आवंटित कर दी जाएगी ताकि जल्द से जल्द राज्य संदर्भ केन्द्रों में कम्प्यूटर और तमाम सामग्री पहुंच जाए.

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उन्होंने अक्टूबर-नवम्बर, 2018 की दसवीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम घोषित किया. उन्होंने बताया कि 10वीं का परीक्षा परिणाम जहां 52.26 प्रतिशत रहा है वहीं 12 वीं का 46.28 प्रतिशत रहा है.

सूबे में निषाद पार्टी की बुनियाद संजय निषाद ने साल 2013 में रखी थी. निषाद पार्टी का पूरा नाम, 'निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल' है. दरअसल, किसी जाति से कोई राजनीतिक दल पंजीकृत नहीं हो सकता है. यही वजह है कि पार्टी का नाम 'निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल' रखा गया जिसका शॉर्ट में नाम 'NISHAD' यानी 'निषाद' होता है.

'निषाद' पार्टी का नाम रखने के पीछे संजय निषाद का सोचा समझा राजनीतिक उद्देश्य था. देश के 14 राज्यों में निषाद वंशीय अनुसूचित जाति में शामिल भी हैं. उत्तर प्रदेश में निषाद वंश से जुड़ी 7 जातियां- मंझवार, गौड़, तुरहा, खरोट, खरवार, बेलदार, कोली अनुसूचित जाति में शामिल हैं, लेकिन अन्य उपजातियों को ओबीसी में रखा गया है. इनमें केवट, मल्लाह, बिंद, मांझी, कश्यप और निषाद उपजातियां शामिल हैं.

संजय निषाद इन्हीं जातियों को संगठित कर अपनी सियासी जमीन को मजबूत करने की कोशिशों में जुटे हैं. वे सबसे पहले सुर्खियों में तब आए जब 7 जून, 2015 को गोरखपुर से सटे सहजनवा क्षेत्र के कसरावल गांव के पास निषादों को अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने की मांग को लेकर रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया था.

संजय निषाद के साथ सैकड़ों की संख्या में निषाद समाज के लोग थे, जिनमें बड़ी संख्या युवा शामिल थे. पुलिस ने जब उन्हें हटाने की कोशिश की तो हिंसक झड़प हुई. पुलिस फायरिंग में अखिलेश निषाद नाम का युवक मारा गया. भीड़ ने कई वाहनों में तोड़-फोड़ की और उसे आग के हवाले कर दिया. इसके बाद संजय निषाद गायब हो गए. हालांकि बाद में उन्होंने सरेंडर किया और जमानत पर रिहा हुए.

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